डब्‍ल्‍यूएचओ: दुनिया की हर चौथी महिला गर्भपात की होती है शिकार

शोधकर्ताओं ने स्वीकार किया है कि कई अमीर देशों में इस स्थिति में सुधार आया है लेकिन जहां तक ग़रीब इलाक़ों की बात है पिछले 15 सालों में वहां कोई बदलाव नहीं आया। जानकारों ने गर्भ निरोधक सेवाओं के नए तरीक़ों को तैयार करने की मांग भी उठाई है। शोध में पाया गया कि दोनों तरह के देशों में- जहां गर्भपात क़ानूनी है और जहां यह ग़ैर-कानूनी है- गर्भपात की दर समान है। 

वैज्ञानिकों के अनुसार जहां दुनिया भर में 1990 से 1994 के दौरान हर साल 5 करोड़ गर्भपात हुए, वहीं 2010 से 2014 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर हर साल 5.6 करोड़ हो गया। विकसित देशों में गर्भपात के मामले बढ़े हैं। अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि इसके पीछे जनसंख्या वृद्धि दर और छोटे परिवार की इच्छा जैसे कारण हो सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉक्टर बेला गनात्रा का कहना है, गर्भपात की ऊंची दर इस बात का सबूत है कि हमें महिलाओं तक असरकारक गर्भनिरोधक सेवाएं पहुंचानी होगी।लेकिन अध्ययन यह भी कहता है कि गर्भनिरोधक तक पहुंच को बढ़ा देने भर से इस समस्या का समाधान नहीं होगा।

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