डिलीवरी के समय सावधानियां

  • डिलीवरी के समय सावधानियां, पूरी गर्भावस्था के दौरान गर्भवती स्त्री अपने होने वाले बच्चे के लिए बहुत सी परेशानियों का सामना करती है एवं उसके स्वास्थय के लिए अपने आहार एवं व्यव्हार में परिवर्तन करती है | बच्चे की डिलीवरी का समय बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है एवं इस समय भी गर्भवती स्त्री को बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए ताकि वह अपने बच्चे को इस दुनिया में जन्म दे सके| डिलीवरी के दौरान हमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए एवं निम्न लिखित सावधानी बरतनी चाहिए :-

  • जब गर्भवती स्त्री को संकुचन प्रारंभ हो जाएँ तो उसके पति एवं नजदीकी परिवार वालों का फ़र्ज़ होता है की उसे किसी अच्छे हॉस्पिटल में ले जाया जाय जहाँ पर महिला रोग विशेषग और शिशु रोग विशेषग उपस्थित हों ताकि नवजात शिशु को इलाज से सम्बंधित सभी सुविधाएँ दी जा सकें, किसी ऐसे अस्पताल जहाँ पर ये सुविधाएँ नहीं हैं या घर पर डिलीवरी करने की कोशिश कभी नहीं करनी चाहिए |

  • डिलीवरी का समय बहुत ही संवेदनशील होता है इस समय गर्भवती स्त्री को काफी परेशानियों एवं दर्द का सामना करना पड़ता है अतः इस समय गर्भवती स्त्री को अपने परिवार का साथ एवं सहारे की आवश्यकता होती है अतः इस समय परिवार में किसी अनुभवी महिला/महिलाओं जो गर्भवती स्त्री को सहारा दे सके का होना बहुत ही जरुरी होता है|
  • कभी कभी गर्भवती स्त्री को डिलीवरी के समय बहुत आधिक ब्लीडिंग भी हो सकती है जिस से गर्भवती स्त्री के शारीर में खून की कमी हो सकती है जो की गर्भवती स्त्री के लिए काफी घातक साबित हो सकता है अतः हो सके तो डिलीवरी किसी अच्छे अस्पताल में करवानी चाहिए जहाँ जरुरत पड़ने पर गर्भवती स्त्री को खून दिया जा सके |

  • डिलीवरी का समय किसी भी गर्भवती स्त्री के लिए ख़ुशी के साथ साथ काफी परेशानियों से भरा भी हो सकता है अतः इस समय गर्भवती स्त्री को आपके प्यार, सहारे और उम्मीदों की आवश्यकता होती है अतः इस समय गर्भवती स्त्री के साथ किया जाने वाला बर्ताव सकारात्मक होना चाहिए|

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