मिर्गी के रोगी को गर्भावस्था में रखनी चाहिए ये सावधानी

मिर्गी के उपचार के लिए ली जाने वाली दवाओं का असर प्रजनन क्षमता पर नहीं पड़ता है। यहां तक कि गर्भावस्था  के दौरान भी महिला मिर्गी की दवा चिकित्साक की सलाह पर ले सकती है और यह उसकी मां बनने की राह में रोड़ा नहीं बनती है। लेकिन गर्भवती महिला को पड़ने वाला मिर्गी का दौरा जच्चा और बच्चा दोनों के लिए तकलीफदायक हो सकता है। उचित देखभाल और योग्य उपचार से वह भी एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है। 

  • मिर्गी के दौरे पडने  की  स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में “टॉक्सीमिया ऑफ प्रेग्नेंसी” कहते हैं। इससे ग्रस्त महिला को स्थिति का पता तब चलता है जब पहनी हुई अंगूठी उंगली में कसने लगती है।
  • मिर्गी की स्थिति में गर्भ धारण करने में कोई परेशानी नहीं है। इस दौरान गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लें। मां के रोग से होने वाले बच्चे पर कोई असर नहीं पड़ता।
  • गर्भवती महिला समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराती रहें, पूरी नींद लें, तनाव में न रहें और नियमानुसार दवाइयां लेती रहें। इससे उन्हें मिर्गी की परेशानी नहीं होगी। गर्भवती महिला के साथ रहने वाले सदस्यों को भी इस रोग की थोड़ी जानकारी होना आवश्यक है।

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