शिशु को नहलाते समय ध्‍यान रखें ये बातें, नहीं पड़ेंगे बीमार

बच्चों को समय पर मालिश करना और उनको नहलाना बहुत जरूरी है। हालांकि बच्‍चों को कब और कैसे नहलाना है ये आप स्‍वयं तय कर सकती हैं। आपको नहलाते समय ऐसा काम बिल्‍कुल भी नहीं करना है जिससे बच्‍चे को किसी प्रकार की समस्‍या न हो। लेकिन कुछ बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है। शिशु को उसकी नींद के समय के आसपास न नहलाएं, शिशु जब भूखा हो तब उसे न नहलाएं और नहलाते समय शिशु को ठंड न लगे ऐसी कुछ बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है।

कब नहलाएं?  

पारंपरिक तौर पर कहा जाए तो शिशु को सूर्योदय से पहले या फिर सुबह के समय नहलाना सबसे अच्छा माना जाता था। ऐसा शायद इसलिए था ताकि नहाने के बाद दिन चढ़ने पर गर्मी बढ़ने से शिशु को फिर से गर्माहट मिल सके।

इस पुरानी परंपरा के पीछे शायद कुछ तर्क जरुर है। नवजात शिशु अपने शरीर का तापमान सही से नियंत्रित नहीं कर पाते और उन्हें बहुत जल्दी ठंड लग सकती है। यदि शिशु को ठंड लगेगी, तो वह स्नान का आनंद नहीं ले सकेगा। इसलिए जब दिन चढ़ने लगे और गर्मी बढ़ती जाए, तब शिशु को आरामदायक तरीके से नहलाया जा सकता है।

इस तरह नहाने के बाद भी शिशु को गर्माहट मिलती रहेगी। यदि आपकी दिनचर्या में ऐसा कर पाना आसान हो, तो अच्छा है। मगर, शिशु को शाम के समय नहलाना भी उतना ही सही है और इससे शिशु को सर्दी-जुकाम लगने का खतरा नहीं बढ़ता, जैसा कि अक्सर माना जाता है। 

 

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